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मध्य प्रदेशराज्य समाचार

सुप्रीम कोर्ट से भोपाल विधायक आरिफ मसूद को राहत, इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज मामले में SIT जांच पर रोक

भोपाल 

 कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ एफआईआर से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। कांग्रेस विधायक को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आरिफ मसूद के खिलाफ मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने FIR दर्ज करने और SIT गठन के निर्देश दिए गए थे। मसूद ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के इस फैसले को चुनौती दी थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट से आरीफ मसूद को राहत मिली और इस फैसले पर फिलहाल रोक लग गई है।

क्या है पूरा मामला

बता दें कि आरिफ मसूद पर गहराए इस संकट का कनेक्शन भोपाल के इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज की मान्यता से जुड़ा है, जहां उन पर फर्जी दस्तावेज जमा करने का आरोप लगा था। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 9 जून 2025 को अमन एजुकेशन सोसाइटी द्वारा संचालित इस कॉलेज की मान्यता रद्द कर दी थी। आरिफ इस कॉलेज के सचिव हैं। हाईकोर्ट ने फर्जी सेल डीड के आधार पर कॉलेज संचालन का आरोप लगाते हुए भोपाल पुलिस आयुक्त को आरिफ के खिलाफ तीन दिन के भीतर FIR दर्ज करने और डीजीपी को SIT गठन के लिए जांच का आदेश दिया था। कोर्ट ने यह भी कहा था कि कॉलेज के संचालन के लिए जाली दस्तावेज बनाने के लिए प्रशासनिक और राजनीतिक समर्थन के बिना संभव नहीं था।

आरिफ मसूद ने हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। वहीं आज, 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने न केवल आरिफ मसूद बल्कि कॉलेज छात्रों को भी बड़ी राहत थी। कोर्ट ने  मसूद के खिलाफ दर्ज FIR की जांच पर स्टे लगा दिया। साथ ही इंदिरा प्रियदर्शनी कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों की पढ़ाई खराब नहीं होगी। वे अब अपनी नियमित पढ़ाई जारी रख सकेंगे।

सिब्बल और तन्खा ने रखा मसूद का पक्ष

सुप्रीम कोर्ट में आज शुक्रवार को जस्टिस जेके माहेश्वरी की बैंच में विधायक मसूद की याचिका पर सुनवाई हुई। कांग्रेस विधायक की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा, वरुण तन्खा ने पक्ष रखा। मसूद के वकील विवेक तन्खा ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने स्टे कर दिया है।

कांग्रेस नेताओं के खिले चेहरे

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही कांग्रेस में खुशी की लहर दौड़ गया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सोशल मीडिया पर पोस्ट के जरिए कहा कि सत्य परेशान हो सकता है, लेकिन पराजित नहीं। कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलना उनकी सच्चाई और ईमानदारी का प्रमाण है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस मामले में दर्ज एफआईआर की जांच पर रोक लगाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि सत्य को दबाया नहीं जा सकता। मसूद जी पर दर्ज मुकदमा राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित प्रतीत होता है। कांग्रेस पार्टी उनके साथ मज़बूती से खड़ी है और हमें देश की न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास है।

एमपी हाईकोर्ट ने कहा था- 3 दिन के अंदर एफआईआर दर्ज करें सोमवार को हाईकोर्ट ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए कॉलेज की मान्यता प्राप्त करने के मामले में सुनवाई करते हुए एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कोर्ट ने भोपाल कमिश्नर को आदेश दिया कि वे तीन दिन के भीतर एफआईआर दर्ज कर इसकी जानकारी कोर्ट को दें।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद भोपाल के कोहेफिजा थाने में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ कूटरचित दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी करने का केस दर्ज किया गया। आरोप है कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अपने कॉलेज को मान्यता दिलवाई।

जस्टिस अतुल श्रीधरन की कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कॉलेज की मान्यता ली थी। कोर्ट ने इंदिरा प्रियदर्शिनी कॉलेज में नए दाखिलों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।

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