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बिहारराज्य समाचार

राज्यसभा चुनाव 2026: बिहार में एनडीए के लिए क्लीन स्वीप आसान नहीं, चुनावी गणित ने राजनीति उलझाई

पटना
बिहार की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव की घोषणा हो गई है. भारत निर्वाचन आय़ोग की तरफ से जारी शेड्यूल के अनुसार 10 राज्यों में होने वाले चुनाव के तहत बिहार की इन सीटों के लिए 26 फरवरी 2026 को अधिसूचना जारी होगी. मतदान 16 मार्च को कराया जाएगा. बता दें कि बिहार में जिन पांच सीटों पर चुनाव होना है, वे फिलहाल अमरेंद्र धारी सिंह (Amarendra Dhari Singh), प्रेम चंद गुप्ता (Prem Gupta), उपेन्द्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha), हरिवंश नारायण सिंह, (Harivansh Narayan Singh) और रामनाथ ठाकुर ( Ram Nath Thakur) के पास हैं . इन सदस्यों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है . चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक 5 मार्च तक नामांकन दाखिल किए जाएंगे, 6 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 9 मार्च तक उम्मीदवार नाम वापस ले सकेंगे .
राज्यसभा चुनाव में संख्याबल की सियासत

राजनीति के जानकारों की नजर में बिहार की इन पांच सीटों के लिए होने वाला चुनाव बिहार की सियासत में नई गणित और नई रणनीतियों को जन्म देगा. बता दें कि  आगामी 9 अप्रैल को मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, ऐसे में सभी दलों की नजर टिकट वितरण और संख्याबल की स्थिति पर टिकी है.  ऐसे देखना दिलचस्प होगा कि कौन दल अपने प्रत्याशियों को राज्यसभा भेजने में सफल रहता है. इसके सियासी गुणा-गणित पर हम बात करेंगे, लेकिन पहले आइए जानते हैं कि चुनाव के लिए महत्वपूर्ण तारीखें कौन -कौन सी हैं.
चुनाव कार्यक्रम की प्रमुख तिथियां

    अधिसूचना जारी होगी- 26 फरवरी 2026
    नामांकन की अंतिम तिथि- 5 मार्च 2026
    नामांकन पत्रों की जांच- 6 मार्च 2026
    नाम वापस लेने की अंतिम तिथि-9 मार्च 2026
    मतदान-16 मार्च 2026 सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक
    मतगणना-16 मार्च 2026 शाम 5 बजे से
    चुनाव प्रक्रिया पूर्ण- 20 मार्च 2026

एनडीए के भीतर फंसा सीट बंटवारे में पेच!

बता दें कि बिहार की 243 सदस्यीय विधानसभा में राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए करीब 42 वोट की जरूरत है. 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए को 202 सीटें मिली थीं. इसमें बीजेपी 89, जदयू 85, लोजपा रामविलास 19, हम 5 और आरएलएम 4 सीटों के साथ शामिल हैं . इस आंकड़े के आधार पर एनडीए आराम से चार सीटें जीत सकता है और पांचवीं पर भी मजबूत दावेदारी रखता है. लेकिन पेच यहीं से शुरू होता है. बीजेपी अब विधानसभा की सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जदयू के पास भी बड़ी ताकत है. दोनों दल दो दो सीटों की मांग कर सकते हैं. जदयू से हरिवंश नारायण सिंह और रामनाथ ठाकुर की दावेदारी मजबूत मानी जा रही है.
संख्या एनडीए के पास, बीजेपी बड़ी पार्टी

दूसरी ओर बीजेपी अपनी बढ़ती ताकत के आधार पर ज्यादा हिस्सेदारी चाह सकती है. वहीं, छोटे दल भी दबाव में हैं. उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी के पास सीमित विधायक हैं, लेकिन वे अपनी सीट बचाना चाहेंगे. लोजपा रामविलास भी अपने 19 विधायकों के आधार पर एक सीट की मांग कर सकती है. ऐसे में सीट बंटवारा ही सबसे बड़ा राजनीतिक गणित बन गया है.
क्या एक सीट भी बचा पाएगा विपक्ष?

वहीं महागठबंधन की स्थिति कमजोर है. आरजेडी, कांग्रेस और वाम दल मिलाकर कुल 35 विधायक ही हैं. यह आंकड़ा एक सीट के लिए जरूरी कोटा से कम है. ऐसे में विपक्ष को या तो अतिरिक्त समर्थन जुटाना होगा या फिर क्रॉस वोटिंग की उम्मीद करनी होगी. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के सामने राज्यसभा में अपनी मौजूदगी बचाने की चुनौती है .
राज्यसभा चुनाव में कौन जीतेगा बाजी?

कुल मिलाकर बिहार में राज्यसभा चुनाव का गणित एनडीए के पक्ष में है, लेकिन राजनीति का असली इम्तिहान गठबंधन के भीतर है . कौन कितनी सीट पाएगा, किसे दोबारा मौका मिलेगा और किसे इंतजार करना होगा, यह तय करेगा कि बहुमत की यह ताकत एकजुट रहती है या भीतर से खींचतान शुरू होती है. विपक्ष के लिए यह चुनाव अस्तित्व बचाने जैसा है, जबकि एनडीए के लिए संतुलन साधने की परीक्षा .

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