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पंजाब/हरियाणाराज्य समाचार

ब्रैम्पटन में गूंजेगी पंजाबी संस्कृति: 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन 17–19 जुलाई तक

चंडीगढ़
कनाडा के ब्रैम्पटन में 17 से 19 जुलाई तक 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन आयोजित होगा। इसमें दुनिया भर के लेखक, विद्वान और सामाजिक चिंतक पंजाबी भाषा, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण तथा वैश्विक विस्तार पर चर्चा करेंगे।

ब्रैम्पटन में होगा विश्व पंजाबी सम्मेलन
कनाडा के शहर Brampton में 17 से 19 जुलाई तक 12वां विश्व पंजाबी सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है। यह तीन दिवसीय आयोजन पंजाबी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। सम्मेलन में विभिन्न देशों से लेखक, शिक्षाविद, कलाकार और सामाजिक चिंतक भाग लेंगे और पंजाबी समाज से जुड़े अहम मुद्दों पर विचार साझा करेंगे।

सम्मेलन को पंजाबी चिंतकों और रचनाकारों के बड़े मंच के रूप में देखा जा रहा है, जहां भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े विषयों पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में साहित्यिक सत्र, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और संवाद आयोजित किए जाएंगे, जिनमें प्रवासी पंजाबी समुदाय के योगदान और बदलते वैश्विक परिदृश्य में पंजाबी संस्कृति की भूमिका पर विशेष फोकस रहेगा।

भाषा और संस्कृति के संरक्षण पर मंथन
इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य पंजाबी भाषा के संरक्षण, प्रचार और आने वाली पीढ़ियों तक इसकी विरासत पहुंचाने के उपायों पर विचार करना है। विशेषज्ञ इस बात पर चर्चा करेंगे कि डिजिटल युग और प्रवासी समाज के बढ़ते प्रभाव के बीच पंजाबी भाषा को कैसे मजबूत बनाया जा सकता है और इसे शिक्षा तथा सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से कैसे आगे बढ़ाया जाए।

सम्मेलन में दुनिया के कई देशों से पंजाबी समुदाय के प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो अपने अनुभव और पहल साझा करेंगे। आयोजकों का मानना है कि विदेशों में बसे पंजाबी समाज ने भाषा और संस्कृति को जीवित रखने में अहम योगदान दिया है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय आयोजनों से विभिन्न देशों में रहने वाले पंजाबी समुदाय के बीच संवाद और सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बढ़ेगा उत्साह
तीन दिवसीय सम्मेलन के दौरान साहित्यिक चर्चाओं के साथ-साथ संगीत, कविता पाठ और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से पंजाबी कला और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ताकि भाषा और संस्कृति के प्रति जुड़ाव और मजबूत हो सके।

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