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संसद की कैंटीन में चाय और कॉफी की कमी, LPG सिलेंडर की किल्लत की वजह से परेशानी!

नई दिल्ली

देशभर में रसोई गैस की किल्लत की शिकायतों के बीच सरकार ने साफ किया है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है. लोगों को परेशानी की असल वजह कालाबाजारी है. सरकार ने इसके साथ ही इन कालाबाजारियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. केंद्र सरकार का कहना है कि देश में रसोई गैस की सप्लाई पूरी तरह सामान्य है और घरेलू एलपीजी उत्पादन में करीब 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई है. सरकार का दावा है कि पेट्रोल, डीजल और गैस का पर्याप्त भंडार मौजूद है, लेकिन विपक्ष का आरोप है कि जमीनी स्तर पर हालात अलग हैं और कई शहरों में लोग सिलेंडर के लिए लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दे रहे हैं।

सरकार का यह भी दावा है कि देश में पेट्रोल और डीजल का भी पर्याप्त भंडार मौजूद है और करीब एक लाख पेट्रोल पंपों में कहीं से भी ईंधन खत्म होने की सूचना नहीं मिली है. साथ ही पीएनजी और सीएनजी की सप्लाई भी सामान्य बताई जा रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने साफ किया है कि घरों, अस्पतालों और जरूरी संस्थानों को एलपीजी सप्लाई को प्राथमिकता दी जा रही है।

भाजपा नेताओं ने एलपीजी संकट को अफवाह करार देते हुए विपक्ष पर जनता में घबराहट फैलाने का आरोप लगाया है. वहीं कांग्रेस, सपा और अन्य विपक्षी दलों का कहना है कि देश के कई हिस्सों में गैस की कमी से लोग परेशान हैं और सरकार को वास्तविक स्थिति स्वीकार करनी चाहिए. विपक्षी दलों का दावा है कि जमीनी हकीकत इससे अलग है. कई शहरों में लोग एलपीजी सिलेंडर के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़े दिखाई दे रहे हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया है कि देश के कई शहरों में गैस जैसे ‘गायब’ हो गई है और लोग भारी परेशानियों का सामना कर रहे हैं।

 नोएडा में 14 गैस एजेंसियों पर रेड, कालाबाजारी के नहीं मिले सबूत, लेकिन लोग परेशान

गौतमबुद्ध नगर में एलपीजी गैस सिलेंडर की कथित किल्लत और कालाबाजारी की शिकायतों के बीच जिला प्रशासन ने अपनी जांच तेज कर दी है. प्रशासन का दावा है कि फिलहाल जिले में गैस की कोई कमी नहीं है और जो माहौल बनाया जा रहा है, वह महज अफवाह है. हालांकि, जमीनी हकीकत इसके उलट दिख रही है, जहां गैस एजेंसियों पर उपभोक्ताओं की भीड़ सिलेंडर के लिए तरस रही है।

जिलाधिकारी मेघा रूपम के निर्देशन में गठित चार संयुक्त टीमें लगातार अलग-अलग गैस एजेंसियों और पेट्रोल पंपों पर छापेमारी कर रही हैं. इन टीमों में खाद्य और रसद विभाग, नापतोल विभाग और संबंधित तेल कंपनियों के अधिकारी शामिल हैं. शुक्रवार को तहसील दादरी क्षेत्र के अंतर्गत 14 गैस एजेंसियों पर विशेष जांच अभियान चलाया गया।

प्रशासन का कहना है कि इन एजेंसियों पर पर्याप्त मात्रा में स्टॉक पाया गया और कालाबाजारी के कोई सबूत नहीं मिले. जनपद में कुल 65 गैस एजेंसियां हैं, जिनमें इंडियन ऑयल की 13, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की 26-26 एजेंसियां शामिल हैं।

'संसद की कैंटीन में भी नहीं मिल रही चाय-कॉफी' LPG सिलेंडर की किल्लत पर कांग्रेस सांसद का दावा

LPG सिलेंडर की किल्लत की खबरों पर कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने कहा, ‘इसमें कोई शक नहीं है कि कमी है… मैं रोज़ा रख रहा हूं, लेकिन कल संसद में चर्चा चल रही थी कि जब सांसदों ने संसद कैंटीन में चाय या कॉफ़ी मांगी, तो उन्हें बताया गया कि यह उपलब्ध नहीं है. और फिर भी, आप दावा करते हैं कि घबराने की कोई बात नहीं है. कालाबाज़ारी की खबरें आ रही हैं, जिसमें कीमतें 1,500 रुपये से लेकर 2,000 रुपये तक मांगी जा रही हैं…

1483 जगहों पर रेड, 24 एफआईआर, 6 गिरफ्तार… यूपी में एलपीजी की कालाबाजारी पर ताबड़तोड़ एक्शन

उत्तर प्रदेश में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने सख्त कदम उठाए हैं. प्रदेशभर में विशेष अभियान चलाते हुए 1483 स्थानों पर निरीक्षण और छापेमारी की गई. इस दौरान कालाबाजारी और अनियमितताओं के मामलों में 24 एफआईआर दर्ज की गईं और 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इसके अलावा 19 अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए हैं।

सरकार के निर्देश पर खाद्य एवं रसद विभाग की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं ताकि किसी भी तरह की जमाखोरी या अवैध बिक्री को रोका जा सके. अधिकारियों का कहना है कि एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था पर विशेष नजर रखी जा रही है।

राज्य सरकार ने प्रदेशभर में 24 घंटे सक्रिय कंट्रोल रूम भी स्थापित किए हैं, जहां से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति की निगरानी की जा रही है. सरकार का कहना है कि आम नागरिकों को ईंधन की निर्बाध उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी तरह की कालाबाजारी को सख्ती से रोका जाएगा।

पटना में एलपीजी की कालाबाजी पर सख्त एक्शन, 4 एफआईआर दर्ज

बिहार की राजधानी पटना में एलपीजी की सुचारू आपूर्ति और वितरण सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है. अब तक एलपीजी नियमों के उल्लंघन के संबंध में चार मामले दर्ज किए गए हैं. इनमें से तीन एफआईआर बाढ़ उपमंडल में और एक दानापुर उपमंडल में दर्ज की गई है।

अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ में रेस्तरां और कैफे संचालकों के खिलाफ घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का इस्तेमाल करने के आरोप में मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि व्यावसायिक सिलेंडरों का इस्तेमाल करना मौजूदा नियमों का उल्लंघन है. दानापुर में एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी के संबंध में एफआईआर दर्ज की गई है।

जिला मजिस्ट्रेट ने कहा कि प्रशासन उपभोक्ताओं के हित में घरेलू एलपीजी की पारदर्शी और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों, जिला स्तरीय अधिकारियों, उप-मंडल अधिकारियों और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को एलपीजी डीलरों और वितरकों के ठिकानों पर नियमित निरीक्षण और छापेमारी करने के निर्देश दिए गए हैं. अधिकारी उपभोक्ताओं और आम जनता से भी प्रतिक्रिया प्राप्त कर रहे हैं।

डीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि कालाबाजारी, जमाखोरी या अधिक कीमत वसूलने की शिकायतें मिलने पर तुरंत एफआईआर दर्ज करें और दोषियों को गिरफ्तार करें. उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी प्रकार की ढिलाई, लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आवश्यक सेवा रखरखाव अधिनियम (ईएसएमए) के तहत उल्लंघनकर्ताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

देश में रसोई गैस की कमी नहीं, 30 प्रतिशत बढ़ा एलपीजी का उत्पादन

सरकार ने साफ किया है कि देश में रसोई गैस (एलपीजी) का घरेलू उत्पादन करीब 30 प्रतिशत बढ़ गया है और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति मौजूद है. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और ऑयल रिफाइनरी) सुजाता शर्मा ने कहा कि 5 मार्च की तुलना में देश की रिफाइनरियां अब करीब 30 प्रतिशत अधिक एलपीजी का उत्पादन कर रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि घरों और जरूरी संस्थानों को रसोई गैस की सप्लाई बिना किसी रुकावट के मिलती रहे।

शर्मा ने बताया कि एलपीजी सप्लाई में घरों, अस्पतालों और शैक्षणिक संस्थानों को प्राथमिकता दी जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि कमर्शियल गैस सिलेंडर राज्य सरकारों को भी उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि जरूरत के हिसाब से वे उन्हें प्राथमिकता के आधार पर वितरित कर सकें।

सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि देश के पास पर्याप्त रिफाइनिंग क्षमता और ईंधन का पर्याप्त भंडार मौजूद है. भारत की मौजूदा कच्चे तेल को रिफाइन करने की क्षमता 258 मिलियन मीट्रिक टन है, और देश की रिफाइनरियां फिलहाल पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं।

शर्मा ने कहा कि इसी वजह से भारत पेट्रोल और डीजल के उत्पादन में लगभग आत्मनिर्भर हो गया है, जिससे इन ईंधनों के आयात की जरूरत कम हो गई है. उन्होंने बताया कि देश में कहीं भी पेट्रोल और डीजल की कमी नहीं है और करीब एक लाख पेट्रोल पंपों में से किसी ने भी ईंधन खत्म होने की स्थिति की सूचना नहीं दी है. उन्होंने कहा कि पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं और उनके पास पर्याप्त ईंधन का स्टॉक मौजूद है।

 

 

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