संतोष मानव
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के दिन लद गए। सब दिन मुख्यमंत्री नहीं रह सकती न? पर यह हो कैसे रहा है? समझिए
1. दीदी यानी ममता बनर्जी मुस्लिम वोटों की अच्छी सौदागर हैं। खूब वोट पाई। तीन बार बम-बम रहीं।
2. इस बार डब्बा गोल है। वह ऐसे कि उन्होंने जिन्न पाले। ये जिन्न मुस्लिम वोटों का जुगाड़ करते थे। जिन्न ढेर हैं। सबका नाम जानकर क्या करेंगे ? कुछ नाम जान लीजिए। मुर्शिदाबाद में हुमायूं कबीर, कोलकाता में फरहाद हकीम। ऐसे ही हर जिले में समझिए
3. हुमायूं कबीर नामक जिन्न ज्यादा होशियार है। उसने सत्ता का खेल समझ लिया। अब जनाब हुमायूं साहब 70 फीसदी आबादी वाले मुर्शिदाबाद के अपने गांव बेलडांगा में बाबरी मस्जिद बनवा रहे हैं। छह दिसंबर को पीता काटकर शिलान्यास भी करवा लिया। अरब से मौलाना भी बुला लिए। ये अरब से ही बुलाएंगे, भारत में मौलानाओं का अकाल है न ! बाबरी का सेंटीमेंट समझते हैं न?
4. बाबरी यानी हिंदुओं को चिढ़ाने वाला और खास तबके को आह्लादित करने वाला नाम।
5. जनाब हुमायूं को इससे क्या? वे तो समझ गए कि राजनीति में ‘मोटा माल’ कैसे बनेगा।
7. तो जनाब बाबरी मस्जिद बनाएंगे। अपनी पार्टी बनाएंगे। पश्चिम बंगाल में 135 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे। 2026 में चुनाव है। दीदी ने जनाब को पार्टी से निकालकर जनाब जी का काम आसान कर दिया है।
8. जनाब का काम हाई कोर्ट ने भी आसान कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि वह किसी को मस्जिद बनाने से नहीं रोक सकता। नाम तय करने से भी नहीं रोक सकते।
9. तो समझिए कि बंगाल अब अयोध्या है। मस्जिद नहीं बनने देंगे। मस्जिद वहीं बनाएंगे। जमकर होगा। ऐसे में दीदी तो समझो गई। दीदी का ‘दीद्दा’ फूट गया।
10. जनाब हुमायूं जिस सीट से जीतते हैं, उसका नाम भरतपुर है। आश्चर्यजनक है कि भरतपुर में बाबरी मस्जिद बनेगी।
11. जनाब हुमायूं कबीर निर्दलीय, कांग्रेस, टीएमसी से चुनाव लड़ चुके हैं। एक बार मुर्शिदाबाद से लोकसभा का चुनाव बीजेपी की टिकट पर लड़कर हार चुके हैं।
12. हुमायूं बाबर के बड़े बेटे का नाम था। जनाब का नाम भी हुमायूं है, तो इसमें आश्चर्य क्या? बेटा, बाप के नाम पर ही मस्जिद बनवाएगा न। हिंदू जले तो जले।
13. कथा समाप्त। जिन्न बागी हो गया और दीदी गई तेल लेने या बूट लाने? वही दीदी जो कल तक कलमा भी पढ़ती थी। सबसे बड़ी खैरख्वाह थी। अब भी पढेगी कलमा शायद? पापी पेट (वोट) का सवाल है बाबा ! अल्लाह के नाम पर दे, मौला के नाम पर दे या बाबा के नाम पर दे। पर दे। दे – दे रे भाई और भाई जान भी। (लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)



