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राजस्थानराज्य समाचार

सीबीआई की बड़ी कार्रवाई: जयपुर ITAT के जज और वकील रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार

जयपुर
₹1 करोड़ से अधिक कैश ज़ब्त, हवाला नेटवर्क से सेट किए जा रहे थे टैक्स अपील्स; संगठित सिंडिकेट का भंडाफोड़ जयपुर। देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने जयपुर में बड़े भ्रष्टाचार सिंडिकेट का पर्दाफाश करते हुए आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) की न्यायिक सदस्य समेत एक वरिष्ठ वकील को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई उस आपराधिक नेटवर्क पर की गई है, जो कथित तौर पर लंबित टैक्स अपीलों को घूस लेकर सेट कर रहा था।
सीबीआई के सूत्रों के अनुसार, इस पूरे मामले में एक एडवोकेट राजेंद्र सिसोदिया, ITAT की न्यायिक सदस्य डॉ. एस. सीतालक्ष्मी, एक सहायक रजिस्ट्रार और अन्य अज्ञात सरकारी व निजी व्यक्तियों के शामिल होने का खुलासा हुआ है। यह पूरा गिरोह appellants (अपीलकर्ताओं) के पक्ष में फैसले दिलवाने के लिए रिश्वत ले रहा था।

घूसखोरी, गिरफ्तारी और ताबड़तोड़ छापेः सीबीआई ने 25 नवंबर, 2025 को इस संगठित अपराध सिंडिकेट के खिलाफ मामला दर्ज किया। इसके साथ ही ITAT के एक एडवोकेट राजेंद्र सिसोदिया को 5.50 लाख रुपये की रिश्वत राशि के साथ गिरफ्तार किया गया। यह रिश्वत कथित तौर पर अपीलकर्ता ने हवाला नेटवर्क के माध्यम से दी थी। इसी कड़ी में ऑपरेशन के अगले ही दिन बुधवार को ITAT जयपुर की न्यायिक सदस्य डॉ. एस. सीतालक्ष्मी को भी गिरफ्तार कर लिया गया। उनकी सरकारी कार से 30 लाख रुपए की संदिग्ध नकदी बरामद हुई। रिश्वत देने वाले अपीलकर्ता मुजम्मल को भी बुधवार को ही गिरफ्तार कर लिया गया है।
सीबीआई की मल्टीपल टीमों ने जयपुर, कोटा और अन्य स्थानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इन छापों के दौरान ₹1 करोड़ से अधिक की नकद राशि, लेन-देन के विवरण, संपत्ति के दस्तावेज़ और अन्य अपराध सिद्ध करने वाले दस्तावेज़ जब्त किए गए हैं, जो एक संगठित सिंडिकेट के अस्तित्व की ओर इशारा करते हैं। जांच एजेंसी ने दावा किया है कि इस गिरोह में उच्च पदस्थ सरकारी कर्मचारी शामिल थे, जो न्यायिक प्रक्रिया को पैसे के दम पर रौंदने का प्रयास कर रहे थे।
बड़ी मछलियां कौन-कौन ?
जांच जारी सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि सहायक रजिस्ट्रार और अन्य अज्ञात लोक सेवकों की भूमिका की जांच की जा रही है। छापे और आगे की कार्रवाई अभी भी जारी है। यह गिरफ्तारी न्यायिक और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल ला सकती है, क्योंकि यह मामला देश के महत्वपूर्ण टैक्स अपीलीय फोरम में उच्च-स्तरीय भ्रष्टाचार को उजागर करता है। सीबीआई का यह 'क्लीन स्वीप' ऑपरेशन दिखाता है कि वह भ्रष्टाचार की जड़ों को खोदने के लिए प्रतिबद्ध है।

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