बठिंडा कस्टोडियल डेथ केस में बड़ा एक्शन, इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मी हत्या के ट्रायल का सामना करेंगे

चंडीगढ़
बठिंडा में पुलिस हिरासत मौत मामले में बड़ा मोड़, इंस्पेक्टर समेत 5 पुलिसकर्मियों पर हत्या का ट्रायल चलेगा। कोर्ट ने सबूतों के आधार पर केस सत्र अदालत को भेजा।
मामला क्या है
पंजाब के बठिंडा में करीब डेढ़ साल पहले हुई एक व्यक्ति की पुलिस हिरासत में मौत के मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। अदालत ने इस केस में आरोपी बनाए गए पंजाब पुलिस के पांच कर्मचारियों के खिलाफ हत्या समेत अन्य धाराओं में ट्रायल चलाने का आदेश दिया है। स्थानीय अदालत ने मामले को सत्र अदालत में भेज दिया है, जिससे अब केस की सुनवाई उच्च स्तर पर होगी।
कोर्ट का अहम फैसला
ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास ने सुनवाई के दौरान कहा कि आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। इसी आधार पर केस को सत्र अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया। इस मामले की अगली सुनवाई 20 अप्रैल को तय की गई है। आरोपियों में उस समय के सीआईए-1 यूनिट के प्रभारी इंस्पेक्टर, एक हेड कांस्टेबल और तीन कांस्टेबल शामिल हैं, जो घटना के समय बठिंडा में तैनात थे।
हिरासत में मौत और टॉर्चर के आरोप
यह मामला गांव लख्खी जंगल के रहने वाले भिंदर सिंह की मौत से जुड़ा है, जिनकी पुलिस हिरासत के दौरान जान चली गई थी। न्यायिक जांच में सामने आया कि भिंदर सिंह के साथ कथित तौर पर गंभीर यातनाएं दी गईं। रिपोर्ट के अनुसार, उन्हें “वॉटरबोर्डिंग” जैसी तकनीक से प्रताड़ित किया गया, जिसमें व्यक्ति को डूबने जैसी स्थिति में लाकर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाया जाता है। जांच में यह भी कहा गया कि उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखा गया था।
पुलिस के दावे पर सवाल
जांच एजेंसियों ने डिजिटल और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर पुलिस के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि भिंदर सिंह की मौत झील में डूबने से हुई थी। जांच में सामने आया कि पुलिस ने घटना को दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। वहीं, मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड से यह भी पता चला कि मृतक और एक आरोपी इंस्पेक्टर के फोन एक ही समय पर एक ही स्थान पर सक्रिय थे, जिससे संदेह और गहरा गया।
परिवार के आरोप और विरोध
मृतक के भाई, जो उस समय जेल में बंद थे, ने अदालत को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि उनके भाई को पुलिस ने अवैध रूप से हिरासत में रखकर प्रताड़ित किया, जिससे उसकी मौत हो गई। परिवार ने भी इस मामले को कस्टोडियल डेथ बताते हुए विरोध प्रदर्शन किया था और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।
पोस्टमॉर्टम में देरी पर भी उठे सवाल
जांच में पोस्टमॉर्टम में दो दिन की देरी को भी संदिग्ध माना गया। यह आशंका जताई गई कि देरी का उद्देश्य परिवार पर दबाव बनाना हो सकता है। इस पहलू ने मामले को और गंभीर बना दिया।
आगे क्या: अब यह मामला सत्र अदालत में चलेगा, जहां सभी सबूतों और गवाहों के आधार पर सुनवाई होगी। इस केस को पंजाब में कस्टोडियल डेथ के मामलों में एक अहम उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है, जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।



