पंजाब में रोजगार कंपनियों को सब्सिडी, नई औद्योगिक नीति में सीमावर्ती जिलों को अतिरिक्त प्रोत्साहन

चंडीगढ़.
पंजाब कैबिनेट ने बुधवार को राज्य की नई औद्योगिक नीति 2026 को मंजूरी दे दी, जिसमें सबसे बड़ा बदलाव रोजगार सृजन से जुड़े प्रोत्साहनों को आसान बनाना है। राज्य सरकार की नई औद्योगिक नीति में रोजगार मुहैया करवाने वाली कंपनियों को सब्सिडी के रूप में प्रति कर्मचारी पैसा दिया जाएगा।
पुरुषों के मामले में यह तीन हजार और महिलाओं को रोजगार देने में यह चार हजार रुपए दिए जाएंगे। अनुसूचित जाति/जनजाति और दिव्यांग कर्मचारियों के लिए 4000 रुपये प्रति माह तय की गई है। आईटी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए यह सहायता 5000 रुपये और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर में कार्यरत कर्मचारियों के लिए 7500 रुपये प्रति माह तक होगी। रोजगार , नई औद्योगिक नीति में मुख्य फोकस के रूप में रखा गया है इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि सरकार ने अब तक बड़ी इंडस्ट्री में निवेश करने पर जो सब्सिडी दी जा रही थी उसे कम करके मध्यम दर्जे की इंडस्ट्री पर लाया गया है। यानी अब उद्योगों को रोजगार सब्सिडी के लिए पात्र होने हेतु 250 करोड़ रुपये निवेश और 1000 कर्मचारियों की शर्त पूरी नहीं करनी होगी। नई नीति में इस सीमा को घटाकर 25 करोड़ रुपये निवेश और 50 कर्मचारियों तक कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस बदलाव से छोटे और मध्यम उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा और राज्य में रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।
निवेश आकर्षित करने की कोशिश
मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में मंजूर इस नीति को पंजाब में निवेश आकर्षित करने और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी माहौल देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नई नीति के माध्यम से पंजाब को फिर से औद्योगिक निवेश के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया जाए। यह पालिसी उस समय आई जब अगले हफ्ते सरकार मोहाली में औद्योगिक समिट करने जा रही है जहां बड़े उद्योगों को पंजाब में निवेश के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। यह नीति उद्योग जगत के व्यापक परामर्श के बाद तैयार की गई है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों को शामिल करते हुए 24 सेक्टर कमेटियों का गठन किया गया था। इन समितियों ने उद्योगों से जुड़े मुद्दों और आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा के बाद सरकार को 601 सिफारिशें सौंपीं, जिनमें से लगभग 77 प्रतिशत को नीति में शामिल किया गया।
20 अलग-अलग प्रकार के इंसेंटिव उपलब्ध होंगे
नई औद्योगिक नीति का ढांचा इस तरह तैयार किया गया है कि निवेशकों को अपने प्रोजेक्ट के अनुसार प्रोत्साहन चुनने की सुविधा मिले। इसके तहत उद्योगों को लगभग 20 अलग-अलग प्रकार के इंसेंटिव उपलब्ध कराए जाएंगे। इनमें एसजीएसटी रीइंबर्समेंट, रोजगार सृजन सब्सिडी, बिजली ड्यूटी में छूट और स्टांप ड्यूटी में छूट प्रमुख हैं। इसके अलावा राज्य सरकार ने पहली बार उद्योगों के लिए कैपिटल सब्सिडी का प्राविधान भी किया है, जिससे नए उद्योगों को शुरुआती निवेश में राहत मिल सकेगी।
इंसेंटिव की अवधि को बढ़ाया गया
सरकार ने औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए इंसेंटिव की अवधि भी बढ़ा दी है। पहले उद्योगों को मिलने वाले प्रोत्साहन 7 से 10 वर्ष तक सीमित थे, जिन्हें अब बढ़ाकर 10 से 15 वर्ष कर दिया गया है। इससे निवेशकों को लंबे समय तक लाभ मिल सकेगा। नई नीति में कुछ क्षेत्रों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इनमें फूड प्रोसेसिंग, टेक्सटाइल, स्पोर्ट्स गुड्स, ऑटो और ऑटो कंपोनेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी-आईटीईएस, इलेक्ट्रिक व्हीकल, डिफेंस और एयरोस्पेस जैसे सेक्टर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निवेश करने वाली इकाइयों को 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
बॉर्डर एरिया के लिए विशेष पैकेज
इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों में औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की गई है। पठानकोट, गुरदासपुर, अमृतसर, तरनतारन, फिरोजपुर और फाजिल्का जैसे जिलों में स्थापित होने वाले उद्योगों को भी 25 प्रतिशत अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए भी नीति में कई प्रावधान किए गए हैं। शुरुआती स्टार्टअप के लिए सीड ग्रांट को 3 लाख रुपये से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा स्टार्टअप के विस्तार के लिए 10 लाख रुपये की दूसरी किस्त का प्राविधान भी किया गया है।
मोहाली में इनोवेशन हब स्थापित करने की योजना
राज्य सरकार मोहाली में इनोवेशन और स्टार्टअप हब स्थापित करने की योजना बना रही है, जिसे उत्तर भारत की ‘सिलिकॉन वैली’ के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। नीति में पर्यावरण संरक्षण पर भी जोर दिया गया है। उद्योगों को जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम स्थापित करने के लिए 10 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी और पराली आधारित बॉयलर अपनाने के लिए 7.5 करोड़ रुपये तक की सहायता देने का प्रावधान किया गया है। उद्योगों को सस्ती बिजली उपलब्ध कराने के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं। आईटी और डेटा सेंटर को औद्योगिक दरों पर बिजली देने के साथ ही ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए 5 रुपये प्रति यूनिट टैरिफ तय किया गया है।
45 कार्य दिवसों के भीतर अनुमतियां देने का लक्ष्य
सरकार का कहना है कि इन सुधारों से उद्योगों के लिए लागत कम होगी और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा उद्योग लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए फास्ट ट्रैक पोर्टल के जरिए समयबद्ध मंजूरी की व्यवस्था भी की गई है, जिसके तहत 45 कार्य दिवसों के भीतर अनुमतियां देने का लक्ष्य रखा गया है। राज्य सरकार का अनुमान है कि नई औद्योगिक नीति के लागू होने के बाद आने वाले वर्षों में पंजाब में बड़े पैमाने पर निवेश आएगा और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। सरकार ने 2026 तक लगभग 75,000 करोड़ रुपये के औद्योगिक निवेश का लक्ष्य तय किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर नीति का प्रभावी क्रियान्वयन होता है और बिजली, भूमि व लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों का समाधान किया जाता है तो पंजाब में औद्योगिक विकास को नई गति मिल सकती है।


