उत्तर प्रदेश में शिशु देखभाल पर खर्च होंगे 1090 करोड़ रुपये, मृत्यु दर घटाने पर होगा फोकस

गाजियाबाद
गाजियाबाद समेत प्रदेश के 75 जिलों में बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के संचालन एवं शिशु देखभाल पर 1090 करोड़ खर्च होंगे।राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन उत्तर प्रदेश की मिशन निदेशक डॉ.पिंकी जोवल ने पहली बार बच्चों की देखभाल के लिये भारी भरकम बजट आवंटित करने के साथ ही इसको खर्च करने के लिये सख्त निर्देश जारी किये हैं।
सीएमओ डा. अखिलेश मोहन ने बजट आवंटन संबंधी पत्र के मिलने की पुष्टि की है। गाजियाबाद समेत सभी जिलों के सीएमओ को भेजे गये पत्र में निर्देश दिये गये हैं कि आवंटित धनराशि का उपयोग वित्तीय नियमों के तहत किया जाये। प्रत्येक भुगतान एफएएमएस एवं एसएनए स्पर्श पोर्टल का प्रयोग करते हुए ससमय नियमानुसार व्यय एवं भुगतान किया जाये।
स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिये 31 लाख का बजट
मेरठ मंडल स्तर पर चिकित्सकों एवं स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण के लिये 31 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया है। एसएनसीयू को बेहतर तरीके से संचालित करने, नये उपकरण लगाने एवं मेंटेनेंस के लिये भी बजट दिया गया है। जिला महिला अस्पताल में 18 बेड के एसएनसीयू, संयुक्त अस्पताल के पीकू-नीकू वार्ड में मेडिकल संसाधन बढ़ाने और छह सीएचसी में अत्याधुनिक नर्सरी बनाने को भी धनराशि दी गई है।
शिशुओं की देखभाल में लगे चिकित्सक एवं स्वास्थ्यकर्मियों के मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण दिलाने का भी रोस्टर जारी किया गया है।शिशु मृत्यु दर को कम करने और आरबीएसके को बेहतर तरीके से संचालित करने के लिये यह धनराशि आवंटित की गई है।
बता दें कि जिले में हर साल 40 से अधिक शिशुओं की मौत नर्सरी में उपचार के दौरान हो रही है।घर पर होने वाली मौत का डाटा अलग है। अकेले जिला महिला अस्पाल में संचालित एसएनसीयू में अप्रैल 2025 से जनवरी 2026 के बीच भर्ती होने वाले 1233 बच्चों में से 29 बच्चों की मौत हुई है। यह रिपोर्ट 28 फरवरी को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में रखी गई।
जिला स्वास्थ्य समिति के समक्ष रखी गई जिला महिला अस्पताल में शिशु मृत्यु की रिपोर्ट
माह शिशु मृत्यु
अप्रैल 3
मई 2
जून 2
जुलाई 10
अगस्त 3
सितंबर 2
नवंबर 4
दिसंबर 0
जनवरी 2026 3



