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राजनीति

विदेशी फंडिंग और जासूसी के आरोपों पर घिरे गांधी परिवार, सुधांशु त्रिवेदी ने मांगा जवाब

नई दिल्ली
भारतीय जनता पार्टी के सांसद और राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने शुक्रवार को भाजपा मुख्यालय पर प्रेसवार्ता कर कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के दौर को लेकर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ विदेशी लेखकों और अभिलेखों में ऐसे उल्लेख हैं, जिन पर कांग्रेस को जवाब देना चाहिए। राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पॉल मैगॉर की किताब ‘स्पाइंग इन साउथ एशिया’ में यह लिखा गया है कि उस समय भारत की व्यवस्था का शायद ही कोई हिस्सा रहा हो जो अमेरिका की खुफिया एजेंसी सीआईए की पहुंच से बाहर रहा हो। उन्होंने आरोप लगाया कि पुस्तक में यह भी उल्लेख है कि पोलित ब्यूरो की ओर से कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन की राशि दी गई थी। उन्होंने कहा कि ये बातें संबंधित देशों के पूर्व अधिकारियों द्वारा दर्ज की गई हैं।

सुधांशु त्रिवेदी ने ‘मित्रोखिन आर्काइव्ज़’ का हवाला देते हुए कहा कि उसमें केजीबी संपर्कों का जिक्र है और दावा किया गया है कि वर्ष 1976 में कांग्रेस पार्टी को दो मिलियन रुपए और बाद में दस लाख रुपए दिए गए थे। उन्होंने कहा कि पचास साल पहले यह रकम बहुत बड़ी मानी जाती थी। भाजपा सांसद ने सवाल किया कि इन पुस्तकों में दर्ज सीधे दावों पर कांग्रेस की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब क्यों नहीं आया है। उन्होंने कच्चातीवू द्वीप को श्रीलंका को सौंपे जाने और 1971 के युद्ध के बाद की परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। त्रिवेदी ने कहा कि 93 हजार पाकिस्तानी युद्धबंदियों की रिहाई और 54 भारतीय सैनिकों की वापसी न होने जैसे मुद्दों पर भी देश जवाब चाहता है कि उस समय किन आधारों पर फैसले लिए गए।

वहीं, दिल्ली की एक अदालत द्वारा आम आदमी पार्टी के नेताओं अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कथित आबकारी नीति मामले में बरी किए जाने पर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। त्रिवेदी ने कहा कि यदि कोई सबूत नहीं था, तो अदालत ने आरोप तय करने की अनुमति कैसे दी? उन्होंने इसे तकनीकी विषय बताते हुए कहा कि अदालत का विस्तृत फैसला पढ़ने के बाद पार्टी संरचित प्रतिक्रिया देगी। उन्होंने यह भी कहा कि करीब 100 सिम कार्ड और मोबाइल फोन नष्ट होने की बात सामने आई है, जिससे साक्ष्यों की कमी की स्थिति उत्पन्न हुई होगी। त्रिवेदी ने कहा कि मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो आगे की कार्रवाई पर विचार करेगा और पार्टी निर्णय का विस्तार से अध्ययन करने के बाद अपना पक्ष रखेगी।

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