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पंजाब/हरियाणाराज्य समाचार

बीपीएल राशन कार्डों में 24% कटौती पर घिरी सरकार, कुमारी सैलजा ने मांगा जवाब

चंडीगढ़
सिरसा सांसद पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने हरियाणा में बीपीएल राशन कार्डों की संख्या में आई भारी कमी को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार के जो आंकड़े सामने आए हैं वे चिंताजनक हैं और यह गरीबों के साथ अन्याय का संकेत देते हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि जनवरी 2024 में प्रदेश में 44.99 लाख बीपीएल राशन कार्ड थे, जो मार्च 2025 में बढ़कर 52.50 लाख हो गए, लेकिन जनवरी 2026 तक यह संख्या घटकर 39.88 लाख रह गई। उन्होंने कहा कि लगभग 24 प्रतिशत की यह कमी कई गंभीर प्रश्न खड़े करती है। क्या वास्तव में प्रदेश में गरीबी इतनी तेजी से कम हुई है या फिर पात्र परिवारों को विभिन्न प्रशासनिक कारणों से सूची से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एससी, एसटी, बीसी वर्गों, दिहाड़ी मजदूरों, विधवाओं और अनाथों के राशन कार्ड परिवार पहचान पत्र में कथित त्रुटियों के आधार पर काटे गए हैं। कुमारी सैलजा ने कहा कि गरीब परिवारों के लिए राशन जीवन का आधार है और यदि पात्र लोगों को योजनाओं से वंचित किया गया है तो यह उनके अधिकारों का हनन है। उन्होंने प्रदेश सरकार से बीपीएल राशन कार्डों में हुई कटौती पर श्वेत पत्र जारी करने, अपील के बाद बहाल किए गए कार्डों का विवरण सार्वजनिक करने तथा पीपीपी और सार्वजनिक वितरण प्रणाली की स्वतंत्र ऑडिट कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने कहा कि जिन पात्र परिवारों के कार्ड गलत डेटा के कारण कटे हैं, उनकी शीघ्र बहाली सुनिश्चित की जानी चाहिए।
सफाई पर लाखों खर्च, ज़मीन पर कूड़ा:
कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं सिरसा से सांसद कुमारी सैलजा ने फतेहाबाद में सफाई व्यवस्था को लेकर सामने आए मामले पर प्रदेश सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि शहर में जगह-जगह कूड़े के ढेर दिखाई दे रहे हैं, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। कुमारी सैलजा ने कहा कि जनता के धन का दुरुपयोग किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। यदि कागजों में खर्च दिखाया गया है और जमीनी स्तर पर परिणाम नजर नहीं आ रहे तो इसकी निष्पक्ष और विस्तृत जांच होनी चाहिए। कुमारी सैलजा ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने उपायुक्त को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने के निर्देश दिए थे, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और जिम्मेदारी तय हो।

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