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अध्यात्म

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या से छुटकारा दिलाएंगे खास फूल, शनिवार को पूजा करने से शनि देव होते हैं प्रसन्न

शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या जीवन की सबसे कठिन अवधियां मानी जाती हैं। इन दौरान आर्थिक तंगी, स्वास्थ्य समस्याएं, मानसिक तनाव, रिश्तों में कलह और करियर में रुकावटें आती हैं। ज्योतिष शास्त्र और पुराणों में बताया गया है कि कुछ विशेष फूलों की पूजा और अर्पण से शनिदेव का अशुभ प्रभाव कम होता है और साढ़ेसाती-ढैय्या का कष्ट जल्दी खत्म हो जाता है। ये फूल हैं – आक का फूल, गुड़हल का फूल, शमी का फूल और अपराजिता का फूल। इन फूलों से शनिवार को पूजा करने से शनि प्रसन्न होते हैं और बुरा प्रभाव कम हो जाता है। आइए जानते हैं इन फूलों से जुड़े उपाय और नियम।

आक का फूल

आक का फूल भगवान शिव और शनिदेव दोनों को अत्यंत प्रिय है। शनिवार को आक के फूल शनिदेव को चढ़ाने से साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव बहुत तेजी से कम होता है। उपाय: शनिवार की शाम शुद्ध होकर हनुमान मंदिर या शनि मंदिर में जाकर 7 या 11 आक के फूल चढ़ाएं। साथ में 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का 108 बार जाप करें। आक के फूल काले कपड़े में लपेटकर बहते पानी में प्रवाहित करें। यह उपाय करने से शनि की क्रूर दृष्टि शांत होती है, कर्ज और मुकदमे की बाधाएं दूर होती हैं। कई भक्तों ने अनुभव किया है कि आक के फूल से साढ़ेसाती का अंतिम चरण बहुत जल्दी खत्म हो जाता है।

गुड़हल (हिबिस्कस) का फूल

गुड़हल का लाल फूल शनिदेव को बहुत प्रिय है। शनिवार को गुड़हल के फूल चढ़ाने से शनि की साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव कम होता है। उपाय: शनिवार को सुबह स्नान के बाद घर के पूजा स्थल पर गुड़हल के 7 फूल रखकर शनि चालीसा का पाठ करें। फिर इन फूलों को शनिदेव की तस्वीर पर चढ़ाएं। इसके बाद 'ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः' मंत्र का जाप करें। यह उपाय स्वास्थ्य, आर्थिक स्थिति और रिश्तों में सुधार लाता है। गुड़हल का फूल शनि की क्रोधाग्नि को शांत करता है और जीवन में स्थिरता लाता है।

शमी का फूल

शमी का फूल शनिदेव की पूजा में बहुत महत्वपूर्ण है। शमी वृक्ष को शनिदेव का प्रतीक माना जाता है। शनिवार को शमी के फूल चढ़ाने से शनि का अशुभ प्रभाव कम होता है। उपाय: शनिवार को शमी वृक्ष के नीचे जाकर शमी के फूल इकट्ठा करें। इन्हें शनिदेव की मूर्ति या तस्वीर पर चढ़ाएं। साथ में शनि मंत्र जपें और तेल का दीपक जलाएं। यह उपाय कोर्ट-कचहरी, दुर्घटना और नौकरी की रुकावटों को दूर करता है। शमी का फूल शनि की साढ़ेसाती के अंतिम चरण में विशेष लाभ देता है।

अपराजिता का फूल

अपराजिता का फूल (क्लाइंबिंग शो पीस) शनि की पूजा में विजय और सफलता का प्रतीक है। शनिवार को अपराजिता के फूल चढ़ाने से शनि का प्रभाव कम होता है और जीवन में विजय मिलती है। उपाय: शनिवार को अपराजिता के नीले फूल इकट्ठा करके शनि मंदिर में चढ़ाएं। 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का जाप करें और फूलों को बहते पानी में प्रवाहित करें। यह उपाय शनि की ढैय्या और साढ़ेसाती से छुटकारा दिलाता है। अपराजिता का फूल व्यक्ति को हर संकट में विजयी बनाता है। इन चार फूलों से शनिवार को पूजा करने से शनिदेव प्रसन्न होते हैं और साढ़ेसाती-ढैय्या का प्रभाव कम हो जाता है। नियमितता, श्रद्धा और सात्विकता रखें। फूल ताजे और साफ होने चाहिए। शनिदेव की कृपा से जीवन में सुख, समृद्धि और शांति आएगी।

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