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दुनिया

चार्जशीट से इनकार पर उग्र हुआ हादी का संगठन, खून बहाने की धमकी देकर भारत का नाम घसीटा

ढाका
बांग्लादेश के चर्चित छात्र नेता और राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान हादी की हत्या के मामले में नया राजनीतिक घमासान खड़ा हो गया है। उनके संगठन इंकलाब मंच ने ढाका पुलिस द्वारा दाखिल चार्जशीट को खारिज करते हुए आरोप लगाया है कि इस हत्या में केवल स्थानीय राजनीतिक तत्व नहीं, बल्कि पूरी आपराधिक साठगांठ और राज्य तंत्र शामिल है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि न्याय नहीं मिला तो जनआंदोलन और तेज होगा।
 
पुलिस की चार्जशीट पर संगठन का कड़ा ऐतराज
ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच ने मंगलवार को इस हत्याकांड में 17 लोगों के खिलाफ औपचारिक आरोप पत्र दाखिल किया। पुलिस के अनुसार, हादी की हत्या राजनीतिक प्रतिशोध में की गई और इसके पीछे सत्तारूढ़ आवामी लीग से जुड़े वार्ड पार्षद तैजुल इस्लाम चौधरी उर्फ बप्पी का हाथ था। मुख्य आरोपी के तौर पर फैसल करीम मसूद का नाम शामिल किया गया है।

हालांकि, इंकलाब मंच के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने चार्जशीट पर सवाल उठाते हुए कहा कि कोई भी समझदार व्यक्ति यह नहीं मानेगा कि एक राष्ट्रीय स्तर के नेता की हत्या केवल एक वार्ड पार्षद के निर्देश पर हो सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि चार्जशीट में असली साजिशकर्ताओं के नाम शामिल नहीं किए गए हैं।

‘मार्च फॉर जस्टिस’ के बाद तीखी चेतावनी
ढाका में ‘मार्च फॉर जस्टिस’ कार्यक्रम के समापन के बाद जाबेर ने कहा कि संगठन ने अब तक शांतिपूर्ण तरीके से न्याय की मांग की, लेकिन सरकार जनता की भावनाओं को नजरअंदाज कर रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर न्याय नहीं मिला तो जिन लोगों ने खून बहाया है, जरूरत पड़ी तो उनसे खून लिया भी जाएगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि हादी की हत्या के पीछे 'भारतीय प्रभुत्व' से जुड़ा बड़ा राजनीतिक संदर्भ है। हालांकि उन्होंने इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किए।

कौन थे शरीफ उस्मान हादी?
32 वर्षीय शरीफ उस्मान हादी जुलाई–अगस्त 2024 के जनआंदोलन के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुए थे, जिसने तत्कालीन हसीना-नेतृत्व वाली सरकार के पतन की राह बनाई। वे आगामी 12 फरवरी के चुनाव के लिए संसदीय उम्मीदवार भी थे। 12 दिसंबर को ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान उनके सिर में गोली मार दी गई थी। हालत गंभीर होने पर उन्हें सिंगापुर एयरलिफ्ट किया गया, लेकिन 18 दिसंबर को उनकी मौत हो गई।

पुलिस का दावा और राजनीतिक कड़ियां
पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी मसूद सीधे तौर पर आवामी लीग की छात्र शाखा छत्र लीग से जुड़ा था। आरोप है कि वार्ड पार्षद बप्पी ने हत्या के बाद मसूद और एक अन्य आरोपी आलमगीर शेख को फरार होने में मदद की। बप्पी पहले पल्लबी थाना छत्र लीग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। गौरतलब है कि यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरका ने पिछले साल आवामी लीग और उसकी छात्र इकाई पर प्रतिबंध लगा दिया था।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर
हादी की हत्या ने बांग्लादेश में नया राजनीतिक तनाव पैदा कर दिया है और भारत-बांग्लादेश संबंध भी इसकी चपेट में आए हैं। कुछ समूहों ने हत्या में भारतीय कड़ी होने का आरोप लगाया, जिसे नई दिल्ली ने सिरे से खारिज किया। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था वहां की सरकार की जिम्मेदारी है और भारत को गलत तरीके से घसीटने वाली झूठी कहानी को नकारा गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत बांग्लादेश में शांति और स्थिरता का समर्थक है।

सीमा पार भागने के दावे पर विवाद
28 दिसंबर को ढाका पुलिस ने दावा किया कि आरोपी मसूद और शेख हल्लुआघाट सीमा से मेघालय में घुस गए। हालांकि भारत के सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे को भ्रामक और निराधार बताया। बीएसएफ और मेघालय पुलिस- दोनों ने कहा कि सीमा पार करने या गारो हिल्स क्षेत्र में आरोपियों की मौजूदगी के कोई सबूत नहीं मिले हैं। फिलहाल इंकलाब मंच ने साफ कर दिया है कि जब तक कथित राज्य तंत्र और बड़े साजिशकर्ताओं को कटघरे में नहीं लाया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।

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