अवैध PG का बढ़ता जाल: मकान मालिक Record देने से कर रहे इंकार

अमृतसर
शहर में अवैध रूप से पी.जी. चलाने के मामले थम नहीं रहे हैं। गुरु नगरी के पॉश एरिया ग्रीन एवेन्यू, जनता कालोनी, रणजीत एवेन्यू-ए, बी, सी, डी, रानी का बाग, गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के सामने कबीर पार्क के इलाके के अलावा व इसके आस-पास सटे क्षत्रों में अवैध ढंग से काफी धड़ल्ले से पी.जी का धंधा चलाया जा रहा है। इन पी.जी में रहते लोग किन-किन क्षेत्रों संबंधित है और उनकी पहचान क्या है? ये एक बहुत बड़ी जांच का विषय है।
पुलिस के पास उपलब्ध नहीं है पूरी जानकारी
सूत्र बताते है कि इस संबंधी पूरी जानकारी क्षेत्रों से संबंधित पुलिस के पास भी उपलब्ध नहीं है। बता दें कि अभी कुछ दिन पहले ही पुलिस उच्च अधिकारी ने एक विज्ञप्ति जारी कर पी.जी व रहने वाले लोगों व किराए के मकानों में रह रहे लोगों को पूरी जानकारी देने की अपील की थी, वहीं सबंधित पुलिस चौकी या थाने के अधिकारी का भी फर्ज बनता है कि उसके अधीन आते इलाकों में किराएदार व पीजी में रहने वालों का पूरा विवरण अपने रिकार्ड में रखे। हाला कि पाया गया है कि अधिकांश पुलिस अधिकारी इन आदेशों को गंभीरता से नहीं लेते और उनके पास इलाकों में चल रहे वैध या अवैध पी.जी की पूरी जानकारी ही नहीं है।
निरंतर बढ़ रही है अवैध पी.जी की संख्या
पंजाब केसरी ने इस सबंध में पहले भी इस सारे मामले प्रति अवगत करवाया था, परंतु सबंधित प्रशासान के सिर से जूं तक नहीं सरकी और नतीजा वहीं एक ढाक के तीन पात वाला ही है। लिहाजा अब समय रहते इन क्षेत्रों में इन अवैध पी.जी की संख्या देखते ही देखते समय रहते काफी बढ़ गई है। अगर शहर में केवल कुछ ही इलाकों जैसे कि सिर्फ जनता कालोनी, ग्रीन एवेन्यू सी-बलाक, रणजीत एवेन्यू के सभी ब्लाकों के अलावा गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के सामने कबीर पार्क, खासला कालेज के सामने मोहिनी पार्क, खंडवाला, न्यू माडल टाऊन आदि के इलाकों की ही बात की जाए, तो उक्त इलाकों में ही ऐसे कई अवैध पी.जी खुल चुके है, जिसमें कई अज्ञात युवक-युवतियों के अलावा अधेड़ आयु तक के लोग रह रहे है।
सबसे खास व हैरानीजनक पहलू यह है कि इन पी.जी में रह रहे लोगों की पहचान क्या है? और वो किन गावों व कस्बों से आए है, इस प्रति पी.जी के अधिकांश मालिकों व संबंधित पुलिस प्रशासन को भी पूरी तरह से पता नहीं है। विशेष बात यह है कि ये युवक-युवतियां व लोग यहां पर क्या करते है, इस बारे में भी शायद पी.जी के मालिकों को पता नहीं? इन मालिकों को तो बस प्रतिमाह इनसे पैसे (किराया) चाहिए और उक्त क्षेत्र से संबंधित पुलिस भी इस प्रति पूरी तनदेही से कार्रवाई नहीं करती दिखती।
पी.जी व किराए पर रहते लोगों की वैरीफेशन होती है अनिवार्य
कानूनन पी.जी में रहते किसी भी व्यक्ति की पुलिस वैरीफीकेशन अनिवार्य होती है। इसकी खास तौर से जिम्मेदारी पी.जी मालिक की भी बनती है, लेकिन ग्रीन एवेन्यू व जनता कालोनी में पुलिस अधिकारी व पी.जी मालिक इस कानून को खुद ही ठेगा दिखाते हुए इसकी धज्जियां उड़ा रहे है। इससे साफ है कि उक्त कानून को सख्ती से लागू करवाने को लेकर सरकारी मशीनरी खासी सुस्त पड़ी है।
हैरानीजनक पहलू यह है किर इन्ही क्षत्रों में विगत कुछ समय से चोरी व लूट-पाट की वारदातों में खासी वृद्धि आंकी गई है। इसके बावजूद भी पुलिस इस प्रति चेती नहीं है। इसके बावजूद पुलिस भी इन पी.जी मालिकों पर कोई भी शिकंजा नहीं कसती, या फिर बात कुछ और है? ये ऐसा तब है जब राज्य में विगत दिनों पी.जी मे रह रहे अज्ञात लोगों द्वारा अपराध जगत में कई संगीन वारदातों को अंजाम दिया जाता रहा है, परंतु इसके बावजूद उक्त अंकित क्षेत्रों के पुलिस प्रशासन द्वारा इस प्रति उदासीनता रवैया अपनाना कई प्रकार के सवालों को जन्म दे रहा है। विशेष बात यह है कि जब इस प्रति सबंधित पुलिस या प्रशासन से पूछा जाता है, तो उनका एकमात्र एक ही रटा-रटाया यहीं दावा होता है कि वे ऐसे लोगों की जानकारियां एकत्र करवा रहे है और ये कार्रवाई जल्द ही पूरी कर ली जाएगी, परंतु इसकी पूरी जानकारी कब तक पुलिस रिकार्ड में सल्पित होगी? ये शायद बताने की जरूरत नहीं है।
रणजीत एवेन्यू में ही चल रहे है कई अवैध पी.जी
सूत्र बताते हैं कि ग्रीन एवेन्यू सी ब्लाक व इसके पास स्थित जनता कालोनी तथा रणजीत एवेन्यू के अलावा मोहिनी पार्क में ही कई ऐसे अवैध पी.जी चल रहे है, जिनका पूरा डेटा संबंधित पुलिस चौकी के पास भी उपलब्ध नहीं है। पता चला है कि पुलिस प्रशासन इस प्रति सख्ती से कार्रवाई नहीं कर रहा है, इससे साफ है कि अधिकारी खुद ही कानून को ठेगा दिखा रहे है। वहीं दूसरा पहलू यह है कि जब कोई बड़ी दुर्घटना घटती है तो ही पुलिस प्रशासन इस प्रति चेतता है। प्रश्न यहां यह है कि इस खुलासे के बावजूद पुलिस इस खुलासे पर कार्रवाई कब शुरू करेगी।



